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Saturday, 1 September 2012



साहित्य-संस्कृति के प्रति समर्पित संस्था
शब्दाक्षर
शायर एवं कवि 'नूर' का सम्मान करते हुए 'शब्दाक्षर' अध्यक्ष- रवि प्रताप सिंह साथ में श्री श्री निवास शर्मा ।


सदीनामा संपादक- जितेन्द्र जितांशु, श्री निवास शर्मा शायर 'नूर' के साथ। 




कवि कुशेश्वर, श्री शर्मा, 'नूर' एवं रवि प्रताप सिंह परिलक्षित।

कवि कुशेश्वर, श्री शर्मा, 'नूर' के साथ दृष्टिगोचर।
 पत्रकार- अनवर हुसेन, लेखक जीवन सिंह, कवि रमेश शर्मा एवं वक्तव्य रखते हुए राज्यवर्द्धन।   


साहित्यि त्रैमासिकी उद्गार के संपादक, कवि-सुरेन्द्र दीप 'नूर' के साथ। 


अंग वस्त्रम भेंट कर 'नूर' का अभिनन्दन करते हुए प्रसिद्ध आलोचक श्री श्री निवास शर्मा।


'नूर' को शॉल अर्पित कर सम्मानित करते हुए 'उद्गार' के संपादक एवं गंभीर रचनाकार सुरेन्द्र दीप।


ह्रदयाउद्गार व्यक्त करते 'नूर'।


गजल पढ़ते हुए शायर एवं कवि नूर मोहम्मद 'नूर'।


पत्रकार- अनवर हुसेन के साथ कवि जीवन सिंह।


पुस्तकाध्यक्ष दिनेश धानुक 'नूर' के सम्मान में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए।


'नूर' का साहित्यिक सम्मान
      साहित्यिक संस्था 'शब्दाक्षर' के तत्वाधान में कवि, शायर, कहानीकार, समीक्षक, संपादक जैसी लगभग समस्त साहित्यिक विधाओं में पारंगत रचनाकार भाई नूर मोहम्मद 'नूर' का साहित्यिक सम्मान, सूर्य कान्त त्रिपाठी 'निराला' पुस्तकालय सभागार, 3 न. कोयला घाट में, किया गया।
      दि.-30-08-12 बृहस्पतिवार, शाम 4 बजे से आयोजित इस सम्मान सभा में कोलकाता शहर के प्रतिनिधि रचनाकारों ने सहभागिता की।
      समारोह दो सत्रों में सम्पन्न हुआ। प्रथम सत्र में सम्मान का कार्यक्रम तथा दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आयोजन हुआ।
      प्रथम सत्र के सम्मान समारोह में सभा में उपस्थित कलमकारों ने मल्यार्पण एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर 'नूर' का स्वागत किया।समारोह मे मनोनीत अध्यक्ष वरिष्ठ आलोचक श्री श्री निवास शर्मा ने नूर को अंगवस्त्रम भेंट किया तो उद्गार पत्रिका के संपादक सुरेन्द्र 'दीप' ने शॉल आच्छादित कर नूर का सम्मान किया। 'शब्दाक्षर' संस्था की ओर से अनेक उपहार प्राप्ति पश्चात प्रारम्भ हुए वक्तव्य के क्रम मे 'नूर' की रचना धर्मिता पर वक्ताओं ने विस्तार से प्रकाश डाला।
      सम्मान समारोह में वक्तव्य का प्रारम्भ करते हुए युवा लेखक जीवन सिंह ने कहा- '' 'नूर' सरल व्यक्तिव्य के धनी हैं। उनके पास आकर हमे सहजता का बोध होता है। उनका व्यक्तिव्य आतंकित नहीं करता। जबकि वे एक बडे रचनाकार हैं।'' इसी क्रम में रमेश कुमार शर्मा ने कहा- 'नूर साहब हम लोगों को सदा प्रेरित करते रहे हैं।' पुस्तकाध्यक्ष एवं कवि दिनेश धानुक ने अपने वक्तव्य मे कहा- ' नूर साहब गुरु समान हैं। इन्होंने हम लोगों को सतत लिखने के लिए प्रेरित किया।' अतुकान्त विधा के चर्चित कवि राज्यवर्धन ने कहा, कि- 'नूर साहब उदारमना हैं। नूर साहब आज साहित्य में कोलकाता के गौरव हैं।' सुरेन्द्र 'दीप' ने नूर को आम आदमी का शायर बताते हुए कहा, कि- 'नूर मोहम्मद नूर ने अपनी रचनाधर्मिता में सहजता को  सर्वोपरि रखा।' सदीनामा के संपादक कवि जितेन्द्र जीताँशु ने प्रसंसात्मक भाव से नूर की सराहना करते हुए कहा- 'नूर भाई के माध्यम से एक नवीन रचनाधर्मिता सामने आती है।वार्षिक साहित्यनामा का प्रकाशन नूर साहब के कुशल संपादकत्व के कारण ही संभव हो पाता है।' अध्यक्ष के सम्बोधन पूर्व नूर ने अपने वक्तव्य में साहित्यिक मित्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा- 'मुझे अभी भी नहीं लगता की मैं कुछ विशेष लिख रहा हूँ. मैं यही चाहता हूँ कि मेरे पास लिखने-पढ़ने वाले एकत्र हों और हम आपस में चर्चा करें।मैं लिखता बहुत हूँ।उसकी तुलना में छपा कम हूँ।' अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री श्री निवास शर्मा ने नूर के साहित्यिक जीवन के सभी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा- 'लेखक की दुनिया कभी नहीं मरती। नूर मोहम्मद 'नूर' एक चिंतनशील लेखक हैं। नूर में एक ज्वालामुखी विद्यमान है। लावा के रुप में उनकी रचनाएं उबल कर बाहर निकलती रहती हैं। एक अच्छा आदमी ही एक अच्छा लेखक बन सकता है।' कार्यक्रम के आयोजक व संचालक 'शब्दाक्षर' संस्था के अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने नूर के साहित्यिक अवदान पर सविस्तार प्रकाश डालते हुए 'नूर मोहम्मद 'नूर' को देश भर में कोलकाता का प्रतिनिधित्व करने वाला शायर बताया।'
      दूसरे सत्र में सरस काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें- सुरेन्द्र दीप, राज्यवर्धन, रवि प्रताप सिंह, दिनेश धानुक, जीवन सिंह, रमेश शर्मा ने कविताएं एवं गजलें सुनाकर उपस्थित श्रोताओ को आल्हादित किया।
      कुशेश्वर, अनवर हुसैन सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी सभागार में उपस्थित थे। दूसरे चरण के काव्य पाठ सत्र का संचालन भी 'शब्दाक्षर' अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने किया।
पुस्तकाध्यक्ष दिनेश धानुक ने धन्यवाद ‍ग्यापित किया।
                                        रवि प्रताप सिंह                                                                                
                                          अध्यक्ष
                                         'शब्दाक्षर'                                                                                                                                                                    
                                    मो.- 8013546942



1 comment:

  1. नूर साहब को बहुत-बहुत बधाई! सचमुच, बिलकुल सही कहा श्री श्रीनिवास शर्मा जी ने कि लेखक की दुनिया कभी मरती नहीं। लेखक की दुनिया का फलक विशाल ही नहीं अविस्मरणीय भी होता है। अपनी कलमकारी के माध्यम से वह हमेशा साहित्य के आकाश में जगमगाता रहता है। सही कहा आपने भी रवि जी कि नूर साहब देश में कोलकाता शायरी के प्रतिनिधि हैं। दो माह पूर्व लुधियाना शहर की एक साहित्यिक गोष्ठी में दानिश भारती जी ने मुझसे पूछा था कि 'क्या कलकत्ते में नूर साहब को आप जानती हैं? उनसे मुलाक़ात होती है? मेरा सलाम उन तक पहुंचा दीजिएगा।' मैंने उनसे कहा था नूर साहब को कौन नहीं जानेगा, हमारे शहर के नामचीन शायर जो हैं। वापसी पर शहर में पहुंचते ही आपका सलाम उन तक पहुंच जाएगा भले ही दूरभाष के ज़रिए।' मुझे बहुत सुखद अनुभूति हुई थी।

    "मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ विशेष लिख रहा हूं" यह कहना नूर साहब की विनम्रता है। कुछ विशेष न लिखा होता तो देश के कोने-कोने में यूं ही साहित्यप्रेमी उनके नाम से परिचित न होते।

    पनु: नूर साहब को मुबारकबाद और शब्दाक्षर को भी बधाई।

    -नीलम शर्मा 'अंशु'

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