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Tuesday, 2 October 2012

'रामविलास शर्मा शतवार्षिकी उत्सव'

कोलकाता की साहित्यिक संस्था 'भारतीय भाषा परिषद' के तत्वाधान में  दिनांक 29/30-09-2012 को दो दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। पहले दिन की अपेक्षा दूसरा दिन अधिक विचारोत्तेजक रहा। 'लोकजागरण और नवजागरण: साहित्यिक परम्पराएं' विषय पर वैसे तो सभी वक्ताओं ने अपने विचार रखे किन्तु सारगर्भित एवं ओजस्वी वक्तव्य से कोलकाता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला ने सभागार को मंत्र मुग्ध कर दिया।

वक्तव्य देते अरुण कमल एवं अन्य वक्ताओं के साथ दाहिने मंचासीन डॉ राजश्री शुक्ला। 

 यथोक्त

 वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं आलोचक गीतेश शर्मा।
अंतिम सत्र के मंचासीन वक्ता।

(प्रस्तुति~रवि प्रताप सिंह)

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